भारत में म्यूचुअल फंड निवेश का एक पसंदीदा जरिया बन चुके हैं । समय के साथ, अलग-अलग तरह के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार की म्यूचुअल फंड योजनाएं शुरू की गई हैं । असल में, इतनी सारी अलग-अलग योजनाओं की वजह से निवेशकों के मन में थोड़ा भ्रम (confusion) भी पैदा हो गया है ।


एक सफल निवेश के लिए जरूरी है कि आप पूरी रिसर्च और समझदारी के साथ आगे बढ़ें ताकि किसी भी नुकसान से बच सकें । इसकी शुरुआत इस बात से होती है कि आप मार्केट में मौजूद अलग-अलग स्कीम्स को समझें । यहाँ हम इन्कम फंड्स (Income Funds) के बारे में विस्तार से बात करेंगे और जानेंगे कि भारत में ये कितने प्रकार के होते हैं, इनके क्या फायदे हैं और भी बहुत कुछ ।

इनकम फंड्स क्या होते हैं? (What are Income Funds?)

इन्कम फंड्स एक प्रकार के डेट फंड (Debt Funds) होते हैं । ये लंबी अवधि के लिए डिबेंचर्स (debentures), कॉर्पोरेट बॉन्ड्स, और सरकारी सिक्योरिटीज जैसे डेट इंस्ट्रूमेंट्स में पैसा लगाते हैं ।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अनुसार, इनकम फंड्स वे डेट फंड हैं जिनकी 'मैकॉले ड्यूरेशन' (Macaulay Duration) 4 साल या उससे ज्यादा होती है । इस आधार पर, इनकम म्यूचुअल फंड की कैटेगरी में दो तरह के डेट फंड आते हैं:

  • मीडियम से लॉन्ग ड्यूरेशन फंड (Medium to Long Duration Fund): इनकी मैकॉले ड्यूरेशन 4 से 7 साल के बीच होती है ।
  • लॉन्ग ड्यूरेशन फंड (Long Duration Fund): इनकी मैकॉले ड्यूरेशन 7 साल से ज्यादा होती है ।

इनकम म्यूचुअल फंड कैसे काम करते हैं?

इन फंड्स के मैनेजर का यह प्रयास रहता है कि ब्याज दरें (interest rates) चाहें घट रही हों या बढ़ रही हों, निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिले । इसके लिए पोर्टफोलियो को बहुत एक्टिव तरीके से मैनेज किया जाता है । फंड मैनेजर मुख्य रूप से दो रणनीतियों का इस्तेमाल करते हैं:

  1. ब्याज से कमाई (Interest Income): इसमें फंड मैनेजर डेट इंस्ट्रूमेंट्स को उनके मैच्योर होने (maturity) तक अपने पास रखता है ताकि नियमित ब्याज मिलता रहे ।
  2. कीमत बढ़ने पर मुनाफा (Earning Gains): अगर बाजार में डेट इंस्ट्रूमेंट्स की कीमत बढ़ती है, तो उन्हें बेचकर मुनाफा कमाया जाता है ।

आमतौर पर, ये फंड उन सिक्योरिटीज को चुनते हैं जिनकी सुरक्षा रेटिंग (quality rating) ज्यादा होती है और जहाँ ब्याज दर का जोखिम कम होता है । अगर पुराना रिकॉर्ड देखें, तो ये फंड पारंपरिक बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से बेहतर रिटर्न देते हैं, और इनमें पैसा निकालने की फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) भी ज्यादा होती है 

किसे निवेश करना चाहिए?

अपनी परिभाषा के अनुसार, इनकम फंड उन निवेशकों के लिए सबसे अच्छे हैं जो कम से मध्यम जोखिम (moderate risk) लेना चाहते हैं और जिनका मुख्य उद्देश्य नियमित कमाई करना है । जो निवेशक ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते और म्यूचुअल फंड की दुनिया में सुरक्षित कदम रखना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है ।

इनकम फंड की मुख्य विशेषताएं (Features)

  • एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio): फंड हाउस आपकी स्कीम को मैनेज करने के बदले जो फीस लेता है, उसे एक्सपेंस रेशियो कहते हैं । SEBI ने इनकम फंड्स के लिए इसकी अधिकतम सीमा 2.25% तय की है । चूंकि डेट फंड होने के कारण इनमें रिटर्न बहुत ज्यादा नहीं होता, इसलिए हाई एक्सपेंस रेशियो आपके मुनाफे को कम कर सकता है । हमेशा कम एक्सपेंस रेशियो वाली स्कीम चुनें ।
  • जोखिम और रिटर्न (Risks and Returns): डेट फंड होने के नाते इसमें दो तरह के रिस्क होते हैं:
    • क्रेडिट रिस्क (Credit Risk): यानी वह जोखिम जहाँ पैसा उधार लेने वाली संस्था (issuer) मूलधन या ब्याज लौटाने में डिफॉल्ट कर जाए ।
    • ब्याज दर का जोखिम (Interest Rate Risk): ब्याज दरों में बदलाव के कारण फंड की सिक्योरिटीज की वैल्यू कम या ज्यादा होने का रिस्क ।
    • नोट: कभी-कभी बेहतर रिटर्न के लिए फंड मैनेजर कम रेटिंग वाली सिक्योरिटीज में भी पैसा लगा देते हैं, जिससे रिस्क बढ़ सकता है । गिरती ब्याज दरों के दौर में ये फंड 7% से 9% तक का रिटर्न दे सकते हैं ।
  • अपनी योजना के अनुसार निवेश करें: यदि आप लंबे समय के लिए एफडी (Fixed Deposit) कराने की सोच रहे हैं, तो यह एक अच्छा विकल्प है । यह आपकी रेगुलर इनकम को बढ़ाने में मदद करता है । सही तरीका यह है कि जब ब्याज दरें गिर रही हों तब इसमें निवेश करें, और जब दरें बढ़ने लगें तब बाहर निकल जाएं ।

टैक्स के नियम (Taxation)

इनकम म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) इस बात पर निर्भर करता है कि आपने पैसा कितने समय तक निवेशित रखा:

  • शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG): अगर आप 3 साल या उससे पहले पैसा निकालते हैं, तो मुनाफे को आपकी कुल आय में जोड़ दिया जाता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है 
  • लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG): अगर आप 3 साल के बाद पैसा निकालते हैं, तो मुनाफे पर इंडेक्सेशन (indexation) के लाभ के साथ 20% टैक्स लगता है ।

इनकम म्यूचुअल फंड में निवेश के फायदे

  • FD का एक बेहतर विकल्प: ये फंड आमतौर पर बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर रिटर्न देते हैं । हालांकि, ध्यान रहे कि FD पूरी तरह से रिस्क-फ्री (सुरक्षित) होती है, जबकि इनकम फंड्स में क्रेडिट और ब्याज दर का जोखिम होता है ।
  • हाई लिक्विडिटी (High Liquidity): बैंक FD को समय से पहले तोड़ने पर पेनल्टी लगती है, लेकिन इनकम फंड्स में ऐसा कोई लॉक-इन पीरियड नहीं होता । हालांकि, कुछ स्कीम्स में जल्दी पैसा निकालने पर 'एग्जिट लोड' (Exit Load) लग सकता है, इसलिए खरीदने से पहले नियम जरूर जांच लें ।
  • टैक्स में लाभ: अगर आप 30% वाले सबसे ऊंचे टैक्स स्लैब में आते हैं, तो यह आपके लिए फायदेमंद है । FD का ब्याज आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स होता है, जबकि 3 साल बाद इनकम फंड के मुनाफे पर इंडेक्सेशन के साथ सिर्फ 20% टैक्स लगता है ।

स्रोत (Sources)

यह जानकारी "Income Funds.docx" दस्तावेज के निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर आधारित है:

  • इनकम फंड की परिभाषा और SEBI के नियम (मैकॉले ड्यूरेशन 4 वर्ष या अधिक).
  • मीडियम से लॉन्ग ड्यूरेशन और लॉन्ग ड्यूरेशन फंड्स का वर्गीकरण.
  • फंड मैनेजर की कार्यप्रणाली (ब्याज आय और कैपिटल गेन्स).
  • जोखिम (क्रेडिट और ब्याज दर जोखिम) एवं संभावित रिटर्न (7-9%).
  • टैक्स नियम (3 वर्ष से कम और अधिक अवधि के लिए STCG और LTCG).
  • बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के मुकाबले इसके फायदे.

डिस्क्लेमर / अस्वीकरण (Disclosure)

अस्वीकरण: यहाँ व्यक्त किए गए विचार लेखक के हैं । म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन हैं, निवेश करने से पहले योजना से जुड़े सभी दस्तावेजों को ध्यान से जरूर पढ़ें ।

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